जानिए, क्या सच में मछलियों की बारिश होती है क्या ?

क्या सच में मछलियों की बारिश होती है क्या _

क्या सच में मछलियों की बारिश होती है क्या ? क्या सच में आसमान से मछलिया गिरती है ? क्या हम उन्हें खा सकते है ? ऐसे कई सवाल आप की दिल में होंगे. इसीलिए तो आप इस पेज पर हो. तो पढ़ते रहिये आगे आपको इस बारे में बताते है.

दुनिया में कई ऐसे रहस्य आज भी बरकरार है जिन पर यकीन नहीं होता। क्या सच में ऐसा हो सकता है? इन रहस्यों में एक है आसमान से मछलियों की होने वाली बारिश का

 

इसी के बारे में जानने के पाहिले देखिये आज तक हुयी मछलियों के बारिश की तस्वीरें,
fish rain - thailand
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fish rain - thailand 2
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bharatpur, india

जाहिर सी बात है! हम सबको पता है, मछलियाँ पानी की बूंद नही होती जो आसमान से बारिश बन कर गिरेंगी. इनका वाष्पिकरण होने का तो कोई chance ही नही है फिर आसमान तक यह पहुचेंगे कैसे?

  • असल में होता क्या है ये मछलियाँ जो बारिश के दिनों में आसमान से गिरती है यह वही मछलियाँ होती है जो समुंदर में पायी जाती है. लेकिन प्रश्न यह है कि इन्हें आसमान तक पहुचाता कौन है?
  • - इस संबंधी वैज्ञानिकों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं जल स्तंभ या बवंडर के कारण होती हैं। जब बवंडर समुद्र तल को पार करते हैं तो ऐसी स्थिति में पानी के भीषण तूफान में बदल जाते हैं।
  • इस दौरान चलने वाली हवाएं अपने साथ मछलियां, मेंढक, कछुए, केकड़े यहां तक कि कई बार घड़ियालों को भी साथ ले जाती हैं। यह जीव इस बवंडर के साथ उड़ते रहते हैं और तब तक आसमान में होते हैं, जब तक हवा की गति कम न हो जाए।
  • जैसे ही हवा धीमी होती है और यह बवंडर जहां पहुंचता है उसके आसपास के हिस्सों में यह जीव बरसात के पानी के साथ गिरने लगते हैं।

सिर्फ यही नही पानी की सतह पर आते ही बवंडर सतह पर मौजूद मछलियों, मेंढको, मकड़ियो आदि को साथ ही साथ पानी को भी ऊपर की तरफ खिंच लेता है. जब हवा की गति धीमी पड़ती है तब यह बवंडर जहा कही आसमान में रहता है वहा पर सारी चीजों को गिरा देता है. या एक मुसलाधार बारिश के रूप में भी समझा जा सकता है.

निश्चय ही दोनों प्रक्रिया एक ही जगह नही होती. बवंडर को उठने और थमने में समय लगता है और इतने में यह कई किलोमीटर की दुरी भी तय कर चूका होता है. मतलब यह स्पष्ट हैकि बवंडर जहा प्रारंभ करता है वहा यह बारिश होने की कम ही संभावना है लेकिन हाँ इसका समुन्द्र के आस पास होने की संभावना काफी अधिक होती है.

वैज्ञानिको की माने तो हर साल लगभग 40 बार विश्व के अनेक जगहों पर ऐसी घटना देखने को मिलती है. 2016 के मुंबई में मानसून के दौरान भी ऐसा ही कुछ देखने को मिला था.

इस प्रक्रिया में जो हलके प्राणियों को खिंच के ऊपर बादलों में ले जाता है और कभी-कभी इन पर बर्फ का layer भी चढ़ जाता है, बारिश बनकर गिराने की पूरी प्रक्रिया वाकई बहुत की आश्चर्यजनक सी लगती है. बर्फ की चद्दरो में हालाकि हलके प्राणियों का गिरना बेहद खतरनाक भी हो सकता है लेकिन यह दुर्लभ बारिश अब तक सिर्फ 1-2 बार ही हुवा है.

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सारी इमेजेज गूगल से डाउनलोड कर ली गयी है.

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